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भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर: सरेंडर के दावे से उठे सवाल, न्यायिक जांच के आदेश के बाद गरमाई बिहार की राजनीति

भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामला: फेसबुक लाइव में सरेंडर का दावा, न्यायिक जांच के आदेश **आरा, बिहार।** भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र में हुए भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले ने...

पटना
20 Jun 2026, 09:51 PM
भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामला: फेसबुक लाइव में सरेंडर का दावा, न्यायिक जांच के आदेश **आरा, बिहार।** भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र में हुए भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले ने पूरे बिहार में राजनीतिक और सामाजिक बहस छेड़ दी है। घटना के बाद सामने आए फेसबुक लाइव वीडियो ने पुलिस कार्रवाई पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए बिहार सरकार ने न्यायिक जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। जानकारी के अनुसार, पुलिस भरत भूषण तिवारी को पकड़ने के लिए मौके पर पहुंची थी। पुलिस का दावा है कि भरत के पास हथियार था और उन्होंने पुलिस कार्रवाई का विरोध किया, जिसके चलते जवाबी कार्रवाई करनी पड़ी। हालांकि, घटना के बाद सोशल मीडिया पर वायरल हुए फेसबुक लाइव वीडियो ने मामले को नया मोड़ दे दिया है। वायरल वीडियो में भरत भूषण तिवारी पुलिस के सामने अपनी बात रखते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो के कुछ हिस्सों में वे अपनी बंदूक फेंकते हुए और आत्मसमर्पण करते हुए भी नजर आते हैं। इसी वीडियो को आधार बनाकर परिजन और समर्थक दावा कर रहे हैं कि भरत ने सरेंडर कर दिया था, इसलिए उनके खिलाफ घातक बल प्रयोग की आवश्यकता नहीं थी। सूत्रों और सोशल मीडिया पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, भरत भूषण तिवारी क्षेत्र में सामाजिक मुद्दों को लेकर सक्रिय रहते थे। बताया जा रहा है कि वे भोजपुर में विस्थापित परिवारों की समस्याओं और अव्यवस्थाओं को लेकर लगातार आवाज उठाते रहे थे। स्थानीय स्तर पर उन्हें एक मुखर व्यक्ति के रूप में देखा जाता था, जो प्रशासन के सामने जनसमस्याओं को रखने से पीछे नहीं हटते थे। भरत तिवारी के परिवार का आरोप है कि यह कोई वास्तविक मुठभेड़ नहीं बल्कि एक फर्जी एनकाउंटर था। परिजनों का कहना है कि यदि कोई व्यक्ति खुलेआम पुलिस के सामने हथियार छोड़कर आत्मसमर्पण कर रहा हो, तो उसके बाद गोली चलाना कानून और मानवाधिकार दोनों के विरुद्ध है। परिवार ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। दूसरी ओर पुलिस का कहना है कि घटना की परिस्थितियां जटिल थीं और पूरी कार्रवाई कानून के दायरे में की गई। पुलिस अधिकारियों के अनुसार मामले की विस्तृत जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। मामले के तूल पकड़ने के बाद बिहार सरकार ने न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं। जांच में वायरल वीडियो, पुलिस रिकॉर्ड, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य साक्ष्यों की पड़ताल की जाएगी। प्रारंभिक कार्रवाई के तहत संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय जांच भी शुरू कर दी गई है। इस घटना के बाद क्षेत्र में रोष व्याप्त है। स्थानीय लोग और सामाजिक संगठनों ने इस मामले में पारदर्शी जांच की मांग की है। कई स्थानों पर लोगों ने विरोध जताते हुए न्याय की मांग उठाई है। इस घटना को लेकर राजनीतिक दलों के बीच भी आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। कई नेताओं, सामाजिक संगठनों और पूर्व अधिकारियों ने मामले की स्वतंत्र जांच की मांग की है। सोशल मीडिया पर भी बड़ी संख्या में लोग न्यायिक जांच का स्वागत करते हुए सच्चाई सामने लाने की मांग कर रहे हैं। अब पूरे मामले की सच्चाई न्यायिक जांच रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या भरत भूषण तिवारी ने वास्तव में आत्मसमर्पण कर दिया था और यदि ऐसा था तो बाद में हुई पुलिस कार्रवाई किन परिस्थितियों में हुई। इन सवालों के जवाब ही इस चर्चित एनकाउंटर मामले की दिशा तय करेंगे। **रिपोर्ट: खबरिया न्यूज़ डेस्क**

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