कई देशों में 3 से 7 दिन का राशन रखने की सलाह, क्या पूरा विश्व किसी खतरे की ओर बढ़ रहा है? जानिए पूरा मामला
कई देशों में 3 से 7 दिन का राशन रखने की सलाह, क्या पूरा विश्व किसी खतरे की ओर बढ़ रहा है? जानिए पूरा मामला Khabariya News | विशेष रिपोर्ट दुनिया के कई देशों में नागरिकों को घ...
नई दिल्ली
31 Oct 2026, 10:03 PM
31 Oct 2026, 10:03 PM
कई देशों में 3 से 7 दिन का राशन रखने की सलाह, क्या पूरा विश्व किसी खतरे की ओर बढ़ रहा है? जानिए पूरा मामला
Khabariya News | विशेष रिपोर्ट
दुनिया के कई देशों में नागरिकों को घरों में तीन से सात दिनों तक का राशन, पीने का पानी, दवाइयां और अन्य जरूरी सामान सुरक्षित रखने की सलाह दी जा रही है। सरकारों की ओर से जारी इन तैयारियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक नई चर्चा छेड़ दी है। आखिर अचानक कई देशों में लोगों को आपातकालीन परिस्थितियों के लिए तैयार रहने की सलाह क्यों दी जा रही है? क्या दुनिया किसी बड़े संकट की आशंका को देखते हुए अपनी तैयारियां मजबूत कर रही है?
यूरोप से लेकर एशिया तक कई देशों में नागरिक सुरक्षा और आपातकालीन तैयारियों को लेकर जागरूकता बढ़ाई जा रही है। कुछ देशों में लोगों को कम से कम 72 घंटे यानी तीन दिन तक अपनी बुनियादी जरूरतें खुद पूरी करने लायक सामान रखने की सलाह दी गई है, जबकि कुछ देशों की गाइडलाइन में सात दिनों तक की तैयारी का सुझाव भी शामिल है।
इन सलाहों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या दुनिया में आने वाले समय में युद्ध, साइबर हमले, प्राकृतिक आपदाओं या किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय संकट का खतरा बढ़ सकता है?
यूरोपीय संघ ने भी दी थी 72 घंटे की तैयारी की सलाह
यूरोपीय संघ ने मार्च 2025 में अपनी Preparedness Union Strategy पेश की थी। इसके तहत नागरिकों को कम से कम 72 घंटे तक आत्मनिर्भर रहने की तैयारी करने का सुझाव दिया गया था।
इसका उद्देश्य किसी आपातकालीन परिस्थिति में शुरुआती दिनों के दौरान नागरिकों को भोजन, पानी और दूसरी बुनियादी जरूरतों के लिए पूरी तरह बाहरी सहायता पर निर्भर होने से बचाना है।
यूरोपीय देशों में इस तरह की तैयारी को नागरिक सुरक्षा के महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में देखा जा रहा है।
ब्रिटेन, स्वीडन और फिनलैंड में भी आपातकालीन तैयारी पर जोर
स्वीडन और फिनलैंड जैसे देश पहले से ही अपने नागरिकों को संभावित संकटों के लिए तैयार रहने की सलाह देते रहे हैं।
स्वीडन में नागरिकों को लगभग सात दिनों तक अपनी बुनियादी जरूरतें पूरी करने लायक सामान रखने की सलाह दी गई है। फिनलैंड में भी 72 घंटे की आपातकालीन तैयारी को लेकर दिशा-निर्देश मौजूद हैं।
ब्रिटेन में भी आपातकालीन तैयारी को लेकर नागरिकों को जागरूक किया जा रहा है। इन तैयारियों में भोजन, पानी, जरूरी दवाइयां और संचार के वैकल्पिक साधन शामिल हैं।
आखिर क्यों कहा जा रहा है घर में राशन और पानी रखने को?
इसके पीछे कई संभावित कारण बताए जा रहे हैं।
1. अंतरराष्ट्रीय तनाव और युद्ध की आशंका
दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में जारी भू-राजनीतिक तनाव और सैन्य संघर्षों के कारण सरकारें अपनी नागरिक सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने पर ध्यान दे रही हैं।
2. साइबर हमलों का खतरा
बिजली, बैंकिंग, इंटरनेट और सरकारी सेवाओं पर साइबर हमलों की स्थिति में सामान्य जनजीवन प्रभावित हो सकता है। ऐसी परिस्थितियों के लिए पहले से तैयारी करना जरूरी माना जा रहा है।
3. प्राकृतिक आपदाएं
बाढ़, भूकंप, तूफान, जंगलों में आग और चरम मौसम की घटनाओं के कारण कई बार राहत और जरूरी सामान की आपूर्ति बाधित हो सकती है।
4. खाद्य सामग्री और सप्लाई चेन का संकट
किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय संघर्ष या आपातकालीन परिस्थिति में परिवहन, ईंधन और खाद्य सामग्री की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। ऐसे में घरों में जरूरी सामान उपलब्ध होना उपयोगी हो सकता है।
5. बिजली और संचार व्यवस्था बाधित होना
कई दिनों तक बिजली या इंटरनेट सेवाएं प्रभावित होने की स्थिति में आम लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। इसी कारण टॉर्च, बैटरी, रेडियो और पावर बैंक जैसी चीजों को भी आपातकालीन किट में शामिल किया जाता है।
इमरजेंसी किट में क्या-क्या रखने की सलाह दी जाती है?
कई देशों की नागरिक सुरक्षा संबंधी सलाह में आपातकालीन किट तैयार रखने पर जोर दिया गया है। इसमें मुख्य रूप से ये चीजें शामिल हैं:
- पीने का साफ पानी
- कम से कम तीन दिनों तक चलने वाला भोजन
- बिस्कुट, सूखा भोजन और लंबे समय तक सुरक्षित रहने वाली खाद्य सामग्री
- जरूरी दवाइयां और फर्स्ट एड बॉक्स
- बैटरी वाली टॉर्च और अतिरिक्त बैटरियां
- मोबाइल चार्जर और पावर बैंक
- बैटरी से चलने वाला रेडियो
- महत्वपूर्ण दस्तावेज और कुछ नकदी
- मोमबत्ती, माचिस और जरूरी औजार
- बच्चों, बुजुर्गों और पालतू जानवरों के लिए आवश्यक सामान
कुछ देशों में सात दिनों तक की जरूरतों को ध्यान में रखकर भी तैयारी करने की सलाह दी जाती है।
क्या दुनिया किसी बड़े खतरे की ओर बढ़ रही है?
कई देशों में एक साथ आपातकालीन तैयारियों पर जोर दिए जाने के बाद यह सवाल उठना स्वाभाविक है। हालांकि, सरकारों की इन सलाहों को किसी निश्चित युद्ध, तीसरे विश्व युद्ध या वैश्विक आपदा की घोषणा नहीं माना जा सकता।
आपातकालीन तैयारी का उद्देश्य यह है कि अगर किसी कारण से बिजली, पानी, परिवहन या खाद्य आपूर्ति जैसी आवश्यक सेवाएं प्रभावित होती हैं तो नागरिक शुरुआती दिनों में अपनी बुनियादी जरूरतें पूरी कर सकें।
यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि हर देश की परिस्थितियां, सुरक्षा चुनौतियां और आपदा प्रबंधन की नीतियां अलग-अलग होती हैं।
भारत में क्या है स्थिति?
फिलहाल इस खबर में जिन देशों की आपातकालीन तैयारियों का जिक्र किया गया है, वे उनकी अपनी नागरिक सुरक्षा संबंधी सलाह और नीतियों पर आधारित हैं।
भारत सरकार की ओर से पूरे देश के नागरिकों को तीन से सात दिन का राशन जमा करने का कोई नया देशव्यापी आदेश जारी होने की पुष्टि नहीं है। इसलिए दूसरे देशों की सलाह को भारत सरकार का आदेश बताकर साझा करना सही नहीं होगा।
निष्कर्ष: एहतियात या किसी बड़े संकट की तैयारी?
दुनिया के कई देशों में नागरिकों को आपातकालीन परिस्थितियों के लिए तैयार रहने की सलाह दी जा रही है। भोजन, पानी, दवाइयां और जरूरी सामान सुरक्षित रखने की यह तैयारी युद्ध के अलावा प्राकृतिक आपदाओं, साइबर हमलों और दूसरी आपातकालीन परिस्थितियों में भी काम आ सकती है।
हालांकि, इन तैयारियों को किसी निश्चित वैश्विक संकट का संकेत मानना जल्दबाजी होगी। लेकिन इतना जरूर है कि दुनिया के कई देश अब नागरिक सुरक्षा और आपातकालीन तैयारियों को गंभीरता से ले रहे हैं।
Khabariya News की अपील: अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम पर नजर रखें, आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करें और किसी भी अपुष्ट खबर या अफवाह के आधार पर घबराकर खरीदारी न करें।